जैसे-जैसे वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद टैक्स सीजन अपने चरम पर पहुँचता है, वैसे-वैसे नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों के बीच इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की सरगर्मी बढ़ जाती है। हर साल की तरह इस बार भी सामान्य व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स रिटर्न जमा करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई तय की गई है। इस समय सीमा के नजदीक आते ही सोशल मीडिया और इंटरनेट पर यह चर्चा तेज हो जाती है कि क्या आयकर विभाग इस बार भी आईटीआर फाइल करने की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाएगा। कई बार लोग इस उम्मीद में बैठे रहते हैं कि डेडलाइन आगे बढ़ जाएगी और वे आराम से अपना टैक्स भरेंगे। हालांकि, वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी आधिकारिक घोषणा से पहले टैक्सपेयर्स को समय रहते अपना आईटीआर फॉर्म भर लेना चाहिए।
जानिए क्या 31 जुलाई के बाद मिलेगी अंतिम तिथि में कोई छूट
पिछले कुछ सालों के ट्रेंड्स को देखा जाए तो सरकार ने कोरोना काल या तकनीकी दिक्कतों जैसी विशेष परिस्थितियों में ही इनकम टैक्स रिटर्न की आखिरी तारीख को आगे बढ़ाया था। जब तक वित्त मंत्रालय या केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) की तरफ से कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की जाती, तब तक 31 जुलाई को ही अंतिम और पत्थर की लकीर मानना चाहिए। आखिरी दिनों में आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर ट्रैफिक बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, जिसकी वजह से वेबसाइट धीमी हो सकती है। इस तकनीकी व्यवधान से बचने के लिए समझदारी इसी में है कि आप समय सीमा खत्म होने का इंतजार न करें और अपने सभी जरूरी दस्तावेजों जैसे फॉर्म 16 और एआईएस को इकट्ठा करके तुरंत टैक्स फाइलिंग पूरी करें।
आखिरी तारीख चूकने पर कितना लगेगा जुर्माना और पेनाल्टी
यदि कोई टैक्सपेयर किसी भी कारणवश 31 जुलाई की तय समय सीमा के भीतर अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से चूक जाता है, तो उसे भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है। आयकर नियमों के अनुसार, अंतिम तिथि बीत जाने के बाद रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को बिलेटेड आईटीआर (Belated ITR) कहा जाता है। बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने पर टैक्सपेयर्स को लेट फीस यानी जुर्माना देना होता है। जिन करदाताओं की कुल वार्षिक आय 5 लाख रुपये से अधिक है, उन्हें 5000 रुपये का लेट फाइन देना पड़ता है। वहीं, छोटे टैक्सपेयर्स जिनकी कुल आय 5 लाख रुपये से कम है, उनके लिए यह जुर्माना राशि अधिकतम 1000 रुपये तय की गई है। इसके अलावा, यदि आपका कोई टैक्स बकाया है, तो उस पर हर महीने 1 प्रतिशत की दर से अतिरिक्त ब्याज भी जुड़ता जाता है।
देरी से आईटीआर भरने के अन्य बड़े नुकसान
भारी-भरकम जुर्माने और ब्याज के अलावा समय पर इनकम टैक्स रिटर्न न भरने के और भी कई गंभीर परिणाम होते हैं। नियमों के मुताबिक, यदि आप 31 जुलाई के बाद अपना रिटर्न दाखिल करते हैं, तो आप उस वित्तीय वर्ष में हुए किसी भी व्यावसायिक नुकसान या शेयर बाजार के कैपिटल लॉस को अगले वर्षों के लिए कैरी फॉरवर्ड (आगे ट्रांसफर) नहीं कर पाएंगे। इसका मतलब यह है कि भविष्य में होने वाले मुनाफे के सामने आप इस नुकसान की छूट नहीं ले पाएंगे। इसके साथ ही, देरी से भरा गया रिटर्न आपके सिबिल स्कोर और वित्तीय इतिहास पर भी नकारात्मक असर डालता है, जिससे भविष्य में होम लोन या कार लोन मिलने में भी दिक्कतें आ सकती हैं।
कैसे सुरक्षित और सही तरीके से फाइल करें अपना रिटर्न
अगर आप किसी भी तरह की पेनाल्टी और कानूनी पचड़े से बचना चाहते हैं, तो बिना किसी देरी के आज ही अपना इनकम टैक्स रिटर्न ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर सबमिट करें। सबसे पहले अपनी आय के स्रोतों के हिसाब से सही आईटीआर फॉर्म जैसे आईटीआर 1 या आईटीआर 2 का चयन करें। अपने बैंक खातों के विवरण, पैन कार्ड और आधार कार्ड की जानकारियों का मिलान अपने फॉर्म 26एएस से अच्छी तरह कर लें। रिटर्न फाइल करने के बाद 30 दिनों के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) करना बिल्कुल न भूलें। जब तक आप अपने रिटर्न को आधार ओटीपी या नेट बैंकिंग के जरिए वेरिफाई नहीं करते हैं, तब तक आपकी आईटीआर फाइलिंग की प्रक्रिया को अधूरा माना जाता है और विभाग उस पर कोई रिफंड प्रोसेस नहीं करता है।
By continuing, you agree to the Terms listed here. In case you want to opt out, please click "Do Not Sell or Share My Personal Information" link in the footer of this page.
Opt out of the sale or sharing of personal information
We won't sell or share your personal information to inform the ads you see. You may still see interest-based ads if your information is sold or shared by other companies or was sold or shared previously.