Edible Oil Price Increases: आम आदमी को लगा बड़ा झटका, रिफाइंड और सरसों तेल के दामों में भारी उछाल

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सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यह महंगाई सिर्फ ड्राई फ्रूट्स या ब्रांडेड तेलों तक ही सीमित नहीं रहेगी। अगर खाड़ी देशों (Gulf Countries) के हालात और ज्यादा बिगड़ते हैं, तो इसका सीधा असर हमारे रोजमर्रा के खाने-पीने के सामान, मिठाई, स्नैक्स और होटल इंडस्ट्री पर भी पड़ेगा।
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खाने के तेल की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी को एक बड़ा झटका दिया है। ईरान और इजराइल के बीच युद्ध की आहट से हर चीज संकट में नजर आ रही है। पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात का सीधा असर अब खाने के तेल और ड्राई फ्रूट्स के बाजार पर दिखने लगा है। देहरादून में रिफाइंड तेल के दाम 20 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए हैं, वहीं ईरान से आने वाले पिस्ता की कीमत में 1,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक का भारी उछाल आया है। अगर हालात में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में यह महंगाई और तेजी से बढ़ सकती है।

सप्लाई चेन पर पड़ा बुरा असर

दरअसल भारत में पाम ऑयल की सप्लाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। पिछले दो महीनों से चल रहे विवाद और तनाव के कारण माल आने का रास्ता यानी सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हुई है। कंपनियों के पास जो पुराना स्टॉक था, वह धीरे-धीरे खत्म हो चुका है और अब जो नया स्टॉक आ रहा है, वह काफी ऊंचे दामों पर मिल रहा है। यही वजह है कि इसका सीधा असर अब खुदरा बाजार पर देखने को मिल रहा है।

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नामी कंपनियों का जो रिफाइंड तेल महज दो महीने पहले 150 से 160 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था, उसकी कीमत अब बढ़कर 170 से 180 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। तेल के बढ़ते दामों ने घर का बजट संभालने वाली महिलाओं की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसके साथ ही होटल और रेस्तरां चलाने वाले कारोबारियों के सामने भी बड़ा संकट खड़ा हो गया है। गैस के बाद अब तेल की इस महंगाई ने रसोई के पूरे अर्थशास्त्र को बिगाड़ कर रख दिया है।

सप्लाई रुकने से बाजार में अस्थिरता

दूं के एक कारोबारी मोहित रघुवंशी बताते हैं कि खाड़ी देशों से सप्लाई रुकने की वजह से तेल बाजार में उथल-पुथल मची हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही हालात सामान्य नहीं हुए, तो रिफाइंड तेल की कीमतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।


सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि ईरान से आने वाले पिस्ते पर भी इसका गहरा असर पड़ा है। सप्लाई कम होने से पिस्ता 1,000 रुपये प्रति किलो तक महंगा हो चुका है। फिलहाल बाजार में इसकी कीमत लगभग 3,400 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।

आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है महंगाई

चिंता इस बात की है कि यह महंगाई सिर्फ तेल या पिस्ते तक नहीं रुकेगी। अगर खाड़ी देशों का संकट आगे भी जारी रहा, तो इसका असर हमारी थाली के खाने, मिठाई और होटल सेक्टर पर भी दिखेगा। व्यापारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाहर खाना खाना और महंगा हो सकता है। महज एक हफ्ते के भीतर खाने के तेल की कीमत 20 से 30 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गई है। कारोबारी जगदीश नेगी, रमेश सिंह, सूरज जोशी, हेम परिहार आदि ने बताया कि महंगाई धीरे-धीरे पैर पसारने लगी है और तेल के दाम बढ़ गए हैं।

आने वाले समय में दूसरी खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने की भी पूरी संभावना है। व्यापारियों के मुताबिक सरसों का तेल जो पहले अलग-अलग वैरायटी के आधार पर 150 से 170 रुपये प्रति लीटर मिलता था, वह अब 160 रुपये से बढ़कर 200 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इसी तरह रिफाइंड तेल 140 रुपये से बढ़कर 150 रुपये प्रति लीटर और तिल का तेल 160 रुपये से बढ़कर 180 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है।

महंगाई के इस डर के बीच जिला पूर्ति विभाग भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। बाजार में तेल की जमाखोरी को रोकने के लिए जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल ने क्षेत्रीय पूर्ति निरीक्षकों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों को साफ तौर पर कहा गया है कि अगर बाजार में नकली किल्लत पैदा करने या कालाबाजारी की कोई भी शिकायत मिलती है, तो तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए।



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