FD Investment Tips: ₹5 लाख की एक FD बेहतर या ₹1 लाख की 5 FD? जानें 10 साल में कौन देगा ज्यादा फायदा

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भारत में सुरक्षित निवेश की बात हो और Fixed Deposit यानी FD का नाम न आए, ऐसा मुश्किल है। आज भी लाखों लोग FD को सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न वाला निवेश विकल्प मानते हैं। लेकिन जब बड़ी रकम निवेश करने की बात आती है, तो कई निवेशकों के मन में एक सवाल जरूर आता है कि क्या पूरे ₹5 लाख एक ही FD में निवेश करने चाहिए या फिर ₹1 लाख की 5 अलग-अलग FD बनानी चाहिए?
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दिलचस्प बात यह है कि दोनों विकल्पों में रिटर्न लगभग समान हो सकते हैं, लेकिन लिक्विडिटी, फ्लेक्सिबिलिटी और फाइनेंशियल सुरक्षा के मामले में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। अगर आप भी 10 साल के लिए FD निवेश की योजना बना रहे हैं, तो यह तुलना आपके लिए उपयोगी हो सकती है।


₹5 लाख की एक FD पर कितना मिलेगा रिटर्न?

मान लीजिए आपने ₹5 लाख की एक Fixed Deposit 10 साल के लिए कराई है। यहां कुछ अनुमानित शर्तें ली गई हैं:


  • निवेश राशि: ₹5 लाख
  • ब्याज दर: 7% सालाना
  • अवधि: 10 साल
  • ब्याज की गणना: तिमाही आधार पर
ऐसे में 10 साल बाद मैच्योरिटी पर कुल राशि लगभग ₹10,00,799 तक पहुंच सकती है। यानी निवेश की गई रकम लगभग दोगुनी हो सकती है।


एक FD का अनुमानित कैलकुलेशन

  • निवेश राशि: ₹5,00,000
  • अनुमानित ब्याज: लगभग ₹5,00,799
  • कुल मैच्योरिटी राशि: लगभग ₹10,00,799
यह उदाहरण दिखाता है कि लंबे समय तक FD निवेश करने पर कंपाउंडिंग का अच्छा फायदा मिल सकता है।



अगर ₹1 लाख की 5 अलग-अलग FD बनाएं तो क्या होगा?

अब मान लीजिए कि वही ₹5 लाख की राशि 5 अलग-अलग FD में निवेश की जाती है, जहां हर FD ₹1 लाख की हो। ब्याज दर, अवधि और बाकी शर्तें समान रहती हैं।

एक FD का अनुमानित रिटर्न

  • निवेश राशि: ₹1,00,000
  • अनुमानित ब्याज: लगभग ₹1,00,160
  • कुल मैच्योरिटी राशि: लगभग ₹2,00,160

पांच FD का कुल अनुमानित रिटर्न

  • कुल निवेश राशि: ₹5 लाख
  • कुल मैच्योरिटी राशि: लगभग ₹10 लाख
इससे साफ है कि रिटर्न के मामले में बहुत ज्यादा अंतर नहीं आता। लेकिन असली फर्क सुविधा और लचीलापन में दिखाई देता है।


कई FD बनाना क्यों माना जाता है बेहतर रणनीति?

कई फाइनेंशियल एक्सपर्ट मानते हैं कि बड़ी राशि को अलग-अलग FD में बांटना ज्यादा स्मार्ट रणनीति हो सकती है। इसके पीछे कई कारण हैं।

इमरजेंसी में बेहतर लिक्विडिटी

मान लीजिए अचानक आपको ₹50,000 की जरूरत पड़ जाए।


अगर पूरा पैसा एक ही FD में लॉक है, तो आपको पूरी FD तोड़नी पड़ सकती है और प्रीमैच्योर विदड्रॉल पेनल्टी भी देनी पड़ सकती है।

लेकिन अगर आपने ₹1 लाख की 5 FD बनाई हैं, तो जरूरत पड़ने पर केवल एक FD तोड़कर बाकी निवेश को जारी रखा जा सकता है। इससे बाकी FD पर ब्याज मिलता रहता है।

FD Laddering में मिलती है सुविधा

कई छोटी FD बनाने का एक बड़ा फायदा FD Laddering भी है। इसमें अलग-अलग समय पर मैच्योर होने वाली FD बनाई जाती हैं, जिससे नियमित कैश फ्लो बनाए रखने में मदद मिलती है।

जब ब्याज दरें बदलती हैं, तब यह रणनीति निवेशकों को नए रेट का फायदा उठाने का मौका भी देती है।

ज्यादा सुरक्षा और Diversification

DICGC नियमों के अनुसार, एक बैंक में प्रति जमाकर्ता ₹5 लाख तक की राशि बीमित होती है।

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ऐसे में अगर निवेशक अलग-अलग बैंकों में FD करते हैं, तो उनकी फाइनेंशियल सुरक्षा और मजबूत हो सकती है। इससे concentration risk भी कम होता है।

कब एक FD बेहतर विकल्प हो सकती है?

हालांकि कई FD बनाना सुविधाजनक माना जाता है, लेकिन कुछ निवेशकों के लिए एक ही FD बेहतर विकल्प हो सकती है।

एक FD के फायदे

  • केवल एक मैच्योरिटी डेट याद रखनी होती है
  • अकाउंट मैनेजमेंट आसान रहता है
  • कम कागजी प्रक्रिया होती है
  • रिन्यूअल प्रोसेस सरल रहता है
जो लोग ज्यादा ट्रैकिंग नहीं करना चाहते, उनके लिए एक FD आसान विकल्प हो सकती है।


आखिर कौन सा विकल्प ज्यादा बेहतर है?

अगर केवल रिटर्न की बात करें, तो ₹5 लाख की एक FD और ₹1 लाख की 5 FD दोनों लगभग समान रिटर्न दे सकती हैं। लेकिन कई FD निवेश करने से बेहतर लिक्विडिटी, फ्लेक्सिबिलिटी और इमरजेंसी में आसान फंड एक्सेस का फायदा मिलता है।

वहीं, एक FD उन निवेशकों के लिए बेहतर हो सकती है जो सरल निवेश और आसान मैनेजमेंट पसंद करते हैं।


अंत में सही विकल्प आपकी जरूरत, फाइनेंशियल प्लानिंग और जोखिम क्षमता पर निर्भर करता है।



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