BoB बनाम SBI: सरकारी बैंकों में निवेश का है मन, तो जानें कौन सा शेयर है आपके लिए बेहतर

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सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी बैलेंस शीट को काफी हद तक सुधार लिया है। फंसे हुए कर्ज (NPA) में कमी और रिकॉर्ड मुनाफे ने निवेशकों का भरोसा फिर से जगाया है। फरवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा दोनों ही अपनी मजबूती साबित कर रहे हैं, लेकिन निवेश के लिहाज से दोनों की अपनी अलग खूबियां और चुनौतियां हैं।
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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI): बाजार का दिग्गज

एसबीआई भारत का सबसे बड़ा ऋणदाता है और इसकी पहुंच देश के हर कोने तक है। साल 2026 की तीसरी तिमाही में बैंक ने 21,028 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे अधिक तिमाही मुनाफा दर्ज किया है। इसकी ताकत इसका विशाल डिपॉजिट बेस और 'योनो' (YONO) जैसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो अब 9 करोड़ से अधिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं के साथ निजी बैंकों को कड़ी टक्कर दे रहा है।

निवेशकों के लिए एसबीआई एक 'सेफ हेवन' की तरह है। इसकी लोन ग्रोथ सालाना 16 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, जो इसके बड़े आधार को देखते हुए काफी प्रभावशाली है। ब्रोकरेज हाउस ने इस स्टॉक के लिए 1,300 रुपये तक के लक्ष्य दिए हैं, जो मौजूदा स्तरों से करीब 22 प्रतिशत की बढ़त का संकेत देते हैं।


बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB): मुनाफे की रफ़्तार

बैंक ऑफ बड़ौदा आकार में एसबीआई से छोटा जरूर है, लेकिन रिटर्न और ग्रोथ के मामले में यह किसी से पीछे नहीं है। हालिया तिमाही नतीजों में बैंक ने 5,442 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ दर्ज किया है। इसकी खास बात यह है कि यह शेयर अपने बुक वैल्यू (Book Value) के काफी करीब ट्रेड कर रहा है, जो इसे वैल्यू इनवेस्टर्स के लिए आकर्षक बनाता है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि बैंक ऑफ बड़ौदा का एसेट क्वालिटी मैनेजमेंट और डिजिटल बदलाव (BoB World) इसे भविष्य के लिए एक मजबूत खिलाड़ी बनाता है। ब्रोकरेज हाउस ने इसके लिए 340 रुपये से 350 रुपये तक का टारगेट प्राइस दिया है। कम कीमत वाला शेयर होने के कारण, इसमें छोटे निवेशकों की भागीदारी अधिक देखी जाती है।

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दोनों के बीच मुख्य अंतर (तुलनात्मक विश्लेषण)

अगर हम 2026 के ताजा आंकड़ों की तुलना करें, तो कुछ महत्वपूर्ण बिंदु सामने आते हैं:

मार्केट कैप: एसबीआई का मार्केट कैपिटलाइजेशन 10 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है, जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर है।

डिविडेंड यील्ड: बैंक ऑफ बड़ौदा अपने निवेशकों को करीब 2.87 प्रतिशत की आकर्षक डिविडेंड यील्ड देता है, जबकि एसबीआई में यह लगभग 1.3 प्रतिशत है। नियमित आय चाहने वालों के लिए BoB एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

जोखिम और स्थिरता: एसबीआई एक स्थिर स्टॉक माना जाता है जो बाजार की गिरावट में खुद को बेहतर तरीके से संभालता है। वहीं, बैंक ऑफ बड़ौदा में उतार-चढ़ाव (Beta) थोड़ा अधिक हो सकता है, लेकिन तेजी के समय यह ज्यादा मुनाफा देने की क्षमता रखता है।


2026 में क्या करें निवेशक?

यदि आप एक रूढ़िवादी निवेशक हैं और लंबी अवधि के लिए स्थिरता चाहते हैं, तो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) आपकी पहली पसंद होनी चाहिए। इसकी सहायक कंपनियों (बीमा और म्यूचुअल फंड) की लिस्टिंग इसे अतिरिक्त मजबूती प्रदान करती है।

वहीं, अगर आप थोड़ा जोखिम उठा सकते हैं और ऐसे शेयर की तलाश में हैं जिसका मूल्यांकन (Valuation) अभी भी सस्ता है, तो बैंक ऑफ बड़ौदा आपके पोर्टफोलियो में चार चांद लगा सकता है। जानकारों का कहना है कि पीएसयू बैंकों में अभी भी री-रेटिंग की गुंजाइश बाकी है, खासकर सरकार द्वारा एफडीआई सीमा बढ़ाने और मर्जर की संभावनाओं के बीच।

एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा दोनों ही भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के स्तंभ हैं। किसी एक को चुनना मुश्किल है, क्योंकि दोनों के फंडामेंटल्स मजबूत हैं। एक बेहतर रणनीति यह हो सकती है कि आप अपने निवेश को इन दोनों बैंकों में बांट दें ताकि आपको स्थिरता और ग्रोथ दोनों का लाभ मिल सके।

नोट: शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से चर्चा जरूर करें।



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