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50 हजार रुपये कटे, ATM से मिले सिर्फ 40 हजार, SBI को चुकाने होंगे हजारों रुपये

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पंजाब के एक जिला उपभोक्ता आयोग ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को निर्देश दिया है कि वह एक ग्राहक के खाते से 50,000 रुपये डेबिट होने के बावजूद ATM से सिर्फ 40,000 रुपये मिलने के मामले में 10,000 रुपये ब्याज सहित वापस करे। साथ ही बैंक को 10,000 रुपये मुआवजे के रूप में और 3,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च के तौर पर भी देने का आदेश दिया गया है।
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पठानकोट जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष कुलविंदर सिंह पन्नू, सदस्य रचना अरोड़ा और राज कुमार शुक्ला की पीठ ने पाया कि SBI यह साबित करने के लिए जरूरी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड पेश करने में नाकाम रहा कि सभी लेन-देन सफल रहे थे।

आयोग ने क्या आदेश दिया


“मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए, शिकायतकर्ता की वर्तमान शिकायत स्वीकार की जाती है और विपक्षी पक्ष संख्या 2 (SBI बैंक) को निर्देश दिया जाता है कि वह विवादित 10,000 रुपये की राशि को 6% वार्षिक ब्याज सहित, डेबिट की तारीख से लेकर वास्तविक भुगतान तक वापस करे। इसके अलावा, विपक्षी पक्ष संख्या 2 को सेवा में कमी तथा मानसिक उत्पीड़न और पीड़ा के लिए 10,000 रुपये मुआवजे के रूप में और 3,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च के रूप में भी भुगतान करने का निर्देश दिया जाता है,” 29 मई के आदेश में कहा गया।


दरअसल, आयोग शक्ति सिंह मल्होत्रा द्वारा दायर एक शिकायत की सुनवाई कर रहा था, जब यह आदेश पारित किया गया। उनके पास इंडसइंड बैंक में खाता था और उन्हें कथित तौर पर 50,000 रुपये की निकासी का संदेश मिला, जबकि SBI के ATM से सिर्फ 40,000 रुपये ही निकले थे।

SBI जिम्मेदार, इंडसइंड बैंक नहीं: कोर्ट


आयोग ने कहा कि SBI की ओर से CCTV फुटेज, ATM जर्नल प्रिंटआउट या कोई दूसरा जरूरी इलेक्ट्रॉनिक सबूत पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि लेन-देन सही तरीके से हुआ था। यह भी पाया गया कि नोटिस ठीक से दिए जाने के बावजूद SBI आयोग के सामने पेश नहीं हुआ।

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