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SBI ने ग्राहक की बैंक डिटेल्स नियोक्ता के साथ की साझा, उपभोक्ता आयोग ने 25,000 रुपये मुआवजा देने का दिया आदेश

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उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिला उपभोक्ता आयोग ने भारतीय स्टेट बैंक ( SBI ) को ग्राहक की निजी बैंकिंग जानकारी उसकी अनुमति के बिना साझा करने के मामले में सेवा में कमी का दोषी माना है। आयोग ने बैंक को ग्राहक को 25,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।


क्या था पूरा मामला?


शिकायतकर्ता पंकज कुमार शुक्ला पहले गोविंद शुगर मिल में कार्यरत थे। उनका सीतापुर जिले की हरगांव शाखा में SBI का एक बचत खाता था।
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शिकायत के अनुसार, शुक्ला और गोविंद शुगर मिल के बीच श्रम विवाद इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ में लंबित था। इसी दौरान मिल ने अदालत में दाखिल अपने हलफनामे के साथ शुक्ला के हरगांव स्थित बचत खाते का स्टेटमेंट भी प्रस्तुत कर दिया।

शुक्ला का कहना था कि उन्होंने कभी भी SBI को अपने निजी बचत खाते की जानकारी उनके नियोक्ता के साथ साझा करने की अनुमति नहीं दी थी। उनका आरोप था कि इससे उन्हें मानसिक और शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ी।


खाते में गलत एंट्री का भी लगाया आरोप


शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उनके खाते के स्टेटमेंट में कुछ गलत जानकारी दर्ज थीं। बाद में SBI ने 29 अप्रैल 2022 के पत्र के जरिए से इन खामियों को स्वीकार करते हुए उन्हें सुधार दिया।

हालांकि, जब शुक्ला ने बैंक से लिखित रूप में यह पूछा कि उनकी अनुमति के बिना उनके खाते की जानकारी किसी तीसरे पक्ष को क्यों दी गई, तो हरगांव शाखा की ओर से उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

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