यूरिया सब्सिडी अपडेट: सरकार दे रही प्रति बोरी ₹2,700 की सब्सिडी, किसानों को देने पड़ रहे सिर्फ ₹300
केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर किसानों के लिए कई तरह की योजनाएं चला रही हैं ताकि उन्हें आर्थिक रूप से मदद मिल सके। इसी सिलसिले में आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बड़ी बात कही। उन्होंने बताया कि भले ही दुनिया भर में यूरिया की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ी हैं, लेकिन केंद्र सरकार किसानों को सस्ती दरों पर खाद देने के लिए प्रति बोरी लगभग 2,700 रुपये की सब्सिडी अपनी जेब से दे रही है।
आज के समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया के दाम इतने बढ़ चुके हैं कि एक बोरी की असली कीमत करीब 3,000 रुपये तक पहुंच गई है। इसके बावजूद भारत के किसानों को यूरिया की बोरी सिर्फ 300 रुपये में ही दी जा रही है।
वित्त मंत्री ने आगे कहा कि केंद्र सरकार खुद लगभग 2,700 रुपये की सब्सिडी का बोझ उठा रही है, जिससे किसानों के लिए यूरिया का खर्च करीब 300 रुपये के आसपास ही सीमित रहे। उन्होंने याद दिलाया कि कोरोना महामारी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव जैसी मुश्किलों की वजह से यूरिया का आयात बहुत महंगा हो गया था और कई बार तो एक बोरी का आयात खर्च 3,000 रुपये तक चला जाता था। लेकिन इन तमाम चुनौतियों के बाद भी सरकार ने किसानों पर एक पैसे का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने दिया और यूरिया ₹300 प्रति बोरी के हिसाब से उपलब्ध कराती रही।
यूरिया सब्सिडी का लाभ किसे मिलता है?
सब्सिडी की यह राशि सीधे खाद बनाने वाली कंपनियों और आयातकों को दी जाती है। इस समय सरकार की ओर से तय की गई 45 किलोग्राम यूरिया बोरी की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) ₹242 है। इस कीमत में नीम-कोटिंग का खर्च और लागू होने वाले टैक्स शामिल नहीं हैं। सरकार के इस बड़े खर्च को रेखांकित करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि सभी टैक्स और जरूरी प्रक्रिया के बाद भी किसानों को यूरिया लगभग ₹300 में ही मिलती है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि दुनिया भर की समस्याओं, महामारी और कूटनीतिक तनावों के बावजूद प्रधानमंत्री ने यह सुनिश्चित किया कि किसानों को यूरिया केवल ₹300 में ही मिलती रहे। इसके लिए सरकार प्रति बोरी ₹2,700 की छूट दे रही है।
आंध्र प्रदेश में कृषि और बागवानी को बढ़ावा
मदनपल्ले में बोलते हुए वित्त मंत्री ने आंध्र प्रदेश में कृषि और बागवानी के विकास के लिए भी कई नई पहलों का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कृषि और उससे जुड़े दूसरे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के लिए काम कर रही हैं ताकि किसानों को बेहतर सुविधाएं और आधुनिक संसाधन मुहैया कराए जा सकें।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी सार्वजनिक बयानों और आधिकारिक घोषणाओं पर आधारित है। समय और स्थान के अनुसार खाद की कीमतों, स्थानीय करों और सरकारी सब्सिडी में बदलाव संभव है। कृपया यूरिया व अन्य खादों के सटीक और ताजा दामों के लिए अपने नजदीकी कृषि सेवा केंद्र या आधिकारिक सरकारी पोर्टल से संपर्क करें।
आज के समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया के दाम इतने बढ़ चुके हैं कि एक बोरी की असली कीमत करीब 3,000 रुपये तक पहुंच गई है। इसके बावजूद भारत के किसानों को यूरिया की बोरी सिर्फ 300 रुपये में ही दी जा रही है।
वित्त मंत्री ने आगे कहा कि केंद्र सरकार खुद लगभग 2,700 रुपये की सब्सिडी का बोझ उठा रही है, जिससे किसानों के लिए यूरिया का खर्च करीब 300 रुपये के आसपास ही सीमित रहे। उन्होंने याद दिलाया कि कोरोना महामारी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव जैसी मुश्किलों की वजह से यूरिया का आयात बहुत महंगा हो गया था और कई बार तो एक बोरी का आयात खर्च 3,000 रुपये तक चला जाता था। लेकिन इन तमाम चुनौतियों के बाद भी सरकार ने किसानों पर एक पैसे का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने दिया और यूरिया ₹300 प्रति बोरी के हिसाब से उपलब्ध कराती रही।
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यूरिया सब्सिडी का लाभ किसे मिलता है?
सब्सिडी की यह राशि सीधे खाद बनाने वाली कंपनियों और आयातकों को दी जाती है। इस समय सरकार की ओर से तय की गई 45 किलोग्राम यूरिया बोरी की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) ₹242 है। इस कीमत में नीम-कोटिंग का खर्च और लागू होने वाले टैक्स शामिल नहीं हैं। सरकार के इस बड़े खर्च को रेखांकित करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि सभी टैक्स और जरूरी प्रक्रिया के बाद भी किसानों को यूरिया लगभग ₹300 में ही मिलती है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि दुनिया भर की समस्याओं, महामारी और कूटनीतिक तनावों के बावजूद प्रधानमंत्री ने यह सुनिश्चित किया कि किसानों को यूरिया केवल ₹300 में ही मिलती रहे। इसके लिए सरकार प्रति बोरी ₹2,700 की छूट दे रही है।
आंध्र प्रदेश में कृषि और बागवानी को बढ़ावा
मदनपल्ले में बोलते हुए वित्त मंत्री ने आंध्र प्रदेश में कृषि और बागवानी के विकास के लिए भी कई नई पहलों का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कृषि और उससे जुड़े दूसरे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के लिए काम कर रही हैं ताकि किसानों को बेहतर सुविधाएं और आधुनिक संसाधन मुहैया कराए जा सकें।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी सार्वजनिक बयानों और आधिकारिक घोषणाओं पर आधारित है। समय और स्थान के अनुसार खाद की कीमतों, स्थानीय करों और सरकारी सब्सिडी में बदलाव संभव है। कृपया यूरिया व अन्य खादों के सटीक और ताजा दामों के लिए अपने नजदीकी कृषि सेवा केंद्र या आधिकारिक सरकारी पोर्टल से संपर्क करें।





